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१२ मंसिर २०७८, आईतवार
November 28, 2021

‘गुलामी राजनीतिसे बाहेर नाइ निकरटसम् थारु मुक्ति निपैही’

३० भाद्र २०७८, बुधबार
‘गुलामी राजनीतिसे बाहेर नाइ निकरटसम् थारु मुक्ति निपैही’

जिल्ला बर्दिया राजापुर नगरपालिका–२ जोतपुरके सिताराम थारु एक जुझारु युवा नेता हुइटैं । अत्रै किल नाहि उहाँ लेखक, समाजसेवीके रुपमे फे चिन्ह्जैठैं । अब्बे उहाँ बर्दियाली थारु विकास मंच काठमाडौके केन्द्रीय अध्यक्ष, थारु बिद्यार्थी समाजके केन्द्रीय कोषाध्यक्ष ओ थरुहट थारुवान राष्ट्रिय युवाशक्तीके केन्द्रिय अध्यक्ष फेन बटैं । थरुहट तराई विद्यार्थी युनियन केन्द्रीय अध्यक्ष समेत रहिके काम करल अझ्कल उहाँ कीर्तिपुर काठमाडौंमे बरघर रेस्टुरेन्ट संचालन फेन कर्ले बटैं । इहे क्रममे पत्रकार सागर कुश्मीसे करल छोट्मिठ बातचित यहाँ प्रस्तुत कैल बा ।

१. अप्ने युवा नेता, लेखक, समाजसेवी, व्यवसायी फेन हुइटी । अपन परिचय कैसिक देहे रुचैठी ?
–पहिल सुरुम निसराउ साप्ताहिक पत्रीकाके जिउगर बगाल हुकहन मैगर धन्यवाद देह चाहतुँ ओ यी पत्रिका आउर झङ्गल्यार ह्वाए कना शुभकामना देह चाहतुँ । अप्नेक पुछ्ल प्रश्न अनुसार मै यी सक्कु क्षेत्रम सिपार मनंै त निहुइतँु लेकिन भोगाइ ओ सिकाइ म लागल बातँु । पेट पालक् लाग मै व्यापार कर्ठँु, आत्मा सन्तुष्टिके लाग समाजसेवा, सिखल ज्ञान समाजहन बातक ते कलम चलैठँु कलसे एक जिम्मेवार युवाके नातासे देश ओ समाज हन बचाइक लाग राजनिती कर्ठुँ । यी सक्कु चिज मनैंनके जिन्दगीसे जोरल बा ओ अप्ने हम्रे कोनो फें तरिकासे समाजिक ओ राजनीतिक काम कर्ती बाती ।


२. अपन गाउँ ठाउँ छोरके राजधानीमे जाके काहे व्यवसाय सुरुवात कर्ली ? अप्ने गाउँ ठाउँ ओर काहे नै कर्ली ?
–२०५९ साल म मै काठमाडौ छिर्नु । गाउँ छोर्के काठमाडौ बैठ्लक अब्बा लगभग १७ बर्ष होगिल । हुइना त मै म्यानेजमेन्टके विद्यार्थी हुइतुँ लेकिन काठमाडौ म ब्यवसाय करम कना मोर कोनो योजना निरह । तर समय, परिस्थिति ओ संघरियनके सहयोगसे एक्ठो थारुनके पहिचान बोकल रेस्टुरेन्ट खोल्ना योजना बनल । नम्मा समयसम काठमाडौके बसाइ हुइलक ओर्से काठमाडौ छोर्के गाउँम जाके व्यापार कर्ना उफे चुनौती रह । ओ जोन हम्रे स्पेसल थारु परिकारके स्वाद चिखाइ चाहतहि यी रेस्टुरेन्ट गाउँसे ज्यादा राजधानीम महत्त्वपूर्ण रह । थारु जाती कसिन परिकार खैठ ? किल नाइकि हुक्र जियक लाग का का चिज प्रयोग कर्ठ ? उ चिजके प्रस्तुति बरघर रेस्टुरेन्ट कर्ल बा । बरघर रेस्टुरेन्ट नाउँसे लेक थारु जातीहुक्र खैना, लगैना, जिना सक्कु चिजके पहिचान बोक्ल बा । हम्रे फाइदा कमैनासेफे थारुनके चिनारी देहकलाग गाउँम यी रेस्टुरेन्ट नैकैक राजधानी म कर्ना प्रयास कर्ती बाति, ताकी और समुदायके मनैफे पता पाइँत ना ।

३. अप्ने राजनीतिमे छिरल मनैं काठमाडौ जैसिन ठाउँमे बरघर रेस्टुरेन्ट चलैना सोंच कहाँसे आइल ?
–सबसे पहिल त राजनीति म छिरल मनै कोनोफे एक्ठो साइड व्यवसाय करक पर्ना एकदम जरुरी बा । महँगा नेपालके राजनीति म कुछ व्यापार व्यवसाय निकर्ना कलक भ्रष्टाचार बह्रैना हो । भ्रष्टाचारहन रोकक तेनफे नेतन व्यवसाय करक पर्ना जरुरी बा । हम्रे थारु परिकार जबसे काठमाडौ म “थारु राष्ट्रिय माघ महोत्सव“ मनाइ भिर्ली ओत्ठेसे काठमाडौ म थारु परिकारके स्वाद और मनैफे चिख्ना अवसर पैल । बर्षके एकचो किल थारु परिकार घोंघी, सुतही, गेंगटा, बैरिक चट्नी, ढिक्री, अन्डिक भात, बरिया, सिध्रा, आउर थप परिकार खाइ पाइत । यी परिकारहन सद्द कसिक खवाइ सेकजाइ ओ थारु परिकारहन राष्ट्रिय अन्तर्राष्ट्रिय रुपम कसिक चिन्हाँइ सेकजाइ यिह सोच्के बरघर रेस्टुरेन्ट खोल्ना सोच आइल हो । काठमाडौ म नेवारि, थकालि रेस्टुरेन्टसेलेक बिदेशी स्वाद रहल रेस्टुरेन्ट ध्यार बा । यी सक्कु चिजके स्वाद लेति रलक ग्राहक हुकहन आब नयाँ थारु परिकारके स्वाद देहक परल सोच्के बरघर रेस्टुरेन्टके जरम हुइलक हो ।


४.थारु भासा साहित्यमे फेन कलम चलैठी । अभिन सम थारु भासक् पोस्टा काकरे नै निकर्ली ?
–कबु कबु मैफे साहित्य म कलम चलैना प्रयास कर्ठंु, ध्यार त पता निहो लेकिन साहित्यम जत्रा दम ओ सन्तुष्टि बा ओत्रा और क्षेत्रम निहो । साहित्य समाजके जात्तिक चित्रण कर्ल रहत । कृष्णराज सर्बहारी, सुशील चौधरी, नन्दुराज चौधरी, शिव प्रसाद चौधरी उहाँ अग्रज हुकहनके प्रेरणासे यी क्षेत्रम मैफे सिख्ती बातु । कविता, गजल मुक्तकसेफे महिन नाटक लिख्ना मन परत । ध्यार त नाइ चार पाँचठो सम नाटक लिख्ल बातँु । समय मिलि त बहुत हाली थारु नाटक संग्रह निकर्ना सोच बा ।